
“पहले हमारा परिवार मानता था कि लड़कियों को शिक्षा की आवशयक्ता नहीं है क्योकि उनकी शादी होकर दूसरे घर जाना होता है। इसी कारण मेरी बेटी शिवांगी अपना समय घर के कामों में बिताती थी और साधारण हिंदी अक्षर भी नहीं लिख पाती थी। सुश्री रीता के लगातार घर आने और मार्गदर्शन ने हमे बालिका शिक्षा का महतवा समझाया और हमारी सोच पूरी तरह बदल दी। आज मेरी बेटी स्वयं पाठ्यपुस्तकें पड़ सकती है, बुनियादी गणित कर सकती है, और उसके अच्छे संस्कार, स्वत्छता तथा जीवन कौशल सीखे है। मैं अपनी बेटी को शिक्षित करने और एक अभिभावक के रूप में हमारी सोच बदलने के लिए MVda का हिर्दय से धन्यवाद् करती हूँ। “
मनीषा पंवार (शिवांगी की माता )
डुंडा , उत्तरकाशी